गाजियाबाद के वरिष्ठ दंपति का वायरल वीडियो भारतीय संस्कृति पर लगा रहा प्रश्नचिन्ह

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गाजियाबाद। एक वायरल वीडियो जिसमें बुजुर्ग दंपति अपनों द्वारा अपने साथ हुए अन्याय का विवरण कर रहे है । इस वीडियो में दंपत्ति ने अपने बेटे और बहू की करतूत बयां करते हुए डीएम से न्याय की गुहार लगाई। गाजियाबाद की डीएम रितु माहेश्वरी ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पुलिस ने बुजुर्ग दंपत्ति और बेटे में समझौता करा दिया है। दंपति के बेटे ने 10 दिन में परिवार और सामान समेत अपने पिता का मकान खाली करने का लिखित आश्वासन दिया है।

डीएम रितु माहेश्वरी ने मामले का संज्ञान लिया। पुलिस ने बुजुर्ग दंपत्ति और बेटे में समझौता करा दिया है। दंपति के बेटे ने 10 दिन में परिवार और सामान समेत अपने पिता का मकान खाली करने का लिखित आश्वासन दिया है.

क्या भारत बूढ़ा होने के लिए एक सही देश है? 

इस क्षेत्र में कुछ दिलचस्प आंकड़े यहां दिए गए हैं। ग्लोबल एज वॉच इंडेक्स 2014 में, भारत बुजुर्गों (60 साल से अधिक) की देखभाल में 96 देशों में से 71 वें स्थान पर है (चीन (35), श्रीलंका (36) और ब्राजील (31) से नीचे)।

(प्रतिकात्मक सच्चाई)
  • हमारे पास दुनिया में बुजुर्ग लोगों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, जो 2020 तक कुल आबादी का 12% होने का अनुमान है। इसलिए, कुछ परिभाषाओं के तहत, हम एक ‘Ageing population’ हैं।

 

  • हमारे बुजुर्गों में से 80% गरीबी रेखा के नीचे 40% और 73% से अधिक अशिक्षित हैं।

 

  • उनमें से लगभग 90% के पास कोई आधिकारिक सामाजिक सुरक्षा नहीं है (यानी कोई पीएफ, ग्रेच्युटी, पेंशन, आदि)।

 

  • बुजुर्गों में 73% मौतें हृदय रोग, धूम्रपान और कैंसर से संबंधित हैं। 20% डॉक्टर के दौरे, 30% अस्पताल के दिन और 50% बेडरेस्टेड दिन वृद्ध रोगियों को दिए जाते हैं।

 

  • अतिपावन कुम्भ मेले में भी बुजुर्गों का परित्याग होने की ख़बरें सामने आती रही हैं. लेकिन ये कहना बिल्कुल सही नहीं होगा कि कुम्भ में परिवार से बिछड़े हर व्यक्ती का परित्याग ही हुआ हो. कुम्भ जो कि यूनेस्को द्वारा ‘largest religious human gathering on earth’ घोषित है. ऐसे में भीड़ में खो जाना भी एक कारण हो सकता है. 

ग्लोबल ऐज वाच चार प्रमुख डोमेन में देखा गया- आय सुरक्षा, स्वास्थ्य स्थिति, रोजगार और शिक्षा और पर्यावरण को सक्षम करना। और भारत ने सभी चार डोमेन में खराब प्रदर्शन किया।

ऐसे दुर्गम आकड़ों के ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि हमारे बुजुर्गों को कई स्तरों पर देखभाल की आवश्यकता होती है।

वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों से परिचय कराने की युवा पीढ़ी ले ज़िम्मेदारी 

बुजुर्गों की देखभाल करना सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक है जिसके लिए समाज को जिम्मेदार हो जाना चाहिए। जबकि अधिकांश विकसित देशों में कानून और योजनाएं हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी वरिष्ठ नागरिक अपने अधिकारों से वंचित न हों.

(प्रतीकात्मक फोटो जिसके सही हो जाने की हम कामना करते है)

हमारे भारत जैसे देशों की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कम साक्षरता दर के कारण इन अधिकारों से अनजान है। जबकि कुछ सबसे बुनियादी कानूनों में बुजुर्ग कानून और माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव और कल्याण अधिनियम, भारतीय संविधान के अन्य खंड हैं जो बुजुर्गों के अधिकारों और हितों की रक्षा करते हैं।

  • संविधान का अनुच्छेद 41 रोजगार, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता के लिए वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार को सुरक्षित करता है। यह यह भी सुनिश्चित करता है कि राज्य विकलांगता, वृद्धावस्था या बीमारी के मामलों में इन अधिकारों को बरकरार रखे। इस बीच, अनुच्छेद 46 में कहा गया है कि राज्य द्वारा बुजुर्गों के शैक्षिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

 

  • वृद्ध व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति, 1999 के तहत गारंटीकृत अधिकारों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिक भारतीय रेलवे की यात्रा करने हेतु टिकट की कीमतों में 30 प्रतिशत की रियायत के हकदार हैं। 60 से अधिक आयु की महिलाओं के लिए रियायत 50 प्रतिशत है, साथ ही अलग काउंटर सेवाओं के प्रावधान है।

 

  • जबकि विभिन्न धर्मों में वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए अलग-अलग कानून हैं, कुछ बहुत विशेष हैं जैसे कि हिंदू व्यक्तिगत कानून के तहत माता-पिता के रखरखाव के लिए वैधानिक प्रावधान, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम, 1956 की धारा 20 में निहित हैं। मुस्लिम कानूनों, ईसाई कानूनों और यहां तक ​​कि पारसी कानूनों में भी पाया जाता है।

 

  • भारत के आयकर अधिनियम की धारा 88-बी, 88-डी, और 88-डीडीबी वरिष्ठ नागरिकों को कर में छूट का दावा करने की अनुमति देते हैं। बुजुर्ग एलआईसी नीतियों और पोस्ट ऑफिस बचत योजनाओं की एक विस्तृत विविधता के अलावा कर बचत योजनाओं पर अधिक ब्याज पाने के हकदार हैं। 

 

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव और कल्याण अधिनियम, 2007 के अनुसार, यह उत्तराधिकारी के लिए अपने माता-पिता (वरिष्ठ नागरिकों) को मासिक भत्ता प्रदान करने के लिए संतान को एक कानूनी दायित्व देता है, इस अधिनियम की नीति निर्माताओं द्वारा व्यापक रूप से इसके अस्पष्ट और ढीले प्रावधानों के लिए आलोचना की गई है। कई विशेषज्ञों ने भारत में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट कानून के महत्व पर जोर दिया है।

 

  • इस साल मोदी सरकार ऊपर दिए प्रावधान में संशोधन कर, वरिष्ठ नागरिकों का परित्याग करने पर सज़ा को 3 महीने से बढ़ा कर 6 महीने करने की फ़िराक़ में है.

इन सभी अधिकारों को वरिष्ठ नागरिकों से साँझा कर उन्हें उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित कर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी ज़रूर करें.

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