इस हिंदी दिवस पर हिंदी आपसे कुछ कहना चाहती है।

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श्रद्धा उपाध्याय, हिंदी दिवस. जैसा कि आप सभी जानते है कि हम प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाते है | परंतु सिर्फ हिंदी मनाकर ही हम इसकी उपयोगिता को नहीं जान सकते है | और ना सिर्फ हिंदी दिवस मना लेने या इस दिन पर बड़े-बड़े भाषण देकर हम हिंदी की महत्वता को नहीं दर्शा सकते है | इसके लिए हमे हिंदी को अपनाना भी होगा | जो कि आज के वर्तमान युग में लुप्त सी होती जा रही है | आज का मनुष्य हिंदी बोलने पर अपने को समाज में नीचा महसूस करने लगता है | वही दूसरी ओर हम भारतीय होकर भी अपनी भाषा का तिरस्कार कर रहे है और वही विदेशों में इस भाषा का प्रचलन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है | विदेशी लोग हमारे देश में हिंदी सीखने  भी आते है |

 

हिंदी दिवस का इतिहास 

वैसे तो भारत विभिन्नताओं का देश है | परंतु यहां विभिन्नता में एकता दिखाई देती है | साथ ही यहां सभी की बोलियां भी अलग-अलग है | इसके बावजूद भी हिंदी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है | यही वजह है महात्मा गाँधी ने हिंदी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था | उन्होंने 1918 में आयोजित हिंदी

साहित्य-सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था | लंबे विचार के बाद अंत में 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाने का फैसला लिया गया | तभी से हर वर्ष 1953 से 14 सितंबर को पूरे  भारत में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है |  साथ ही यह भी कहा जाता है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी | दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा भी हिंदी है |

हालांकि हिंदी को राजभाषा बनाये जाने से काफी लोग खुश नहीं थे, और इसका विरोध करने लगे | इसके चलते बाद में अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया |

 

हिंदी की वर्तमान स्थिति 

आज हिंदी की वर्तमान स्थिति बहुत हद तक दयनीय बनी हुई है | इसे हिंदी का दुर्भाग्य कहा जाएगा कि इतनी समृद्ध भाषा कोष होने के बाद भी आज हिंदी लिखते और बोलते वक़्त हम लोग ज्यादातर अंग्रेजी भाषा के शब्दों का इस्तेमाल करते है | और तो और कई शब्द चलन से भी हट गए है | ऐसे में हिंदी दिवस मनाकर लोगो को उसकी महत्वता बताना अत्यंत जरूरी है | और  जब तक हम ही लोग अपनी भाषा का उपयोग नहीं करेंगे तब तक इसका विकास भी नहीं हो पायेगा |

  • वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक भारत में 43.63 फीसदी लोग हिंदी भाषा बोलते है |
  • विदेशी कंपनियां हिंदी को बढ़ावा दे रही है | यह तक कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में पहले जहां अंग्रेजी कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता था | गूगल अब हिंदी और अन्य भाषाओं को बढ़ावा दे रहा है |
  • ई-कॉमर्स साइट अमेज़न इंडिया ने अपना हिंदी ऍप लांच किया है | OLX,QUIKER, SNEAPDEAL जैसे प्लेटफॉर्म भी हिंदी में उपलब्ध है |
  • वही गिरते स्तर को लेकर आजकल हिंदी बोलने पर बच्चो से शुल्क लिया जाने लगा है |
  • वही दूसरी ऒर हिंदी बोलने वाले को समाज में नीच दृष्टि से देखा जाता है  |
  • इंटरनेट के प्रसार से अगर किसी को फायदा हुआ है तो वह हिंदी है |
  • आने वाले समय में हिंदी के समाचार-पत्रों और हिंदी चैनलों के पाठकों  और दर्शको में बढ़ोतरी हुई है |
  • साल 2017 में ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में पहली बार ‘अच्छा’, ‘बड़ा दिन’, ‘बच्चा’ और सूर्य नमस्कार जैसे हिंदी शब्दों को शामिल किया गया है  |
  • धीरे-धीरे हिंदी भाषा की विलुप्तता का कारण हम ही लोग है| हम लोगो ने ही हिंदी भाषा को अपनी बोलचाल की भाषा से हटा दिया है | और अंग्रेजी को महत्व देने लगे है |
  • आज विदेशो में हिंदी के अनेको विश्वविद्यालय खुल चुके है, जिनमे अनेकों लोग शिक्षा ग्रहण कर रहे है |

इस प्रकार वर्तमान में हिंदी की स्थिति सही और खराब दोनों है | और इस स्थिति के जिम्मेदार हम लोग ही है | हम लोगो ने ही इसको विशेष दर्जा दिया और आज हम ही लोगो ने इसकी स्थिति को दयनीय बना दिया है | हमारी राष्ट्रभाषा होने के बावजूद हम इसको नहीं पाना रहे है और वही दूसरी ओर विदेशो में इसको विशेष दर्जा दिया जा रहा है | अगर कुछ सालो तक हमने हिंदी के महत्व को नहीं समझा तो आने वाले समय में यह भाषा विलुप्त हो जाएगी और इसके जिम्मेदार हम स्वयं होंगे | इसलिए हमे एकजुट होकर हिंदी भाषा का मान रखते  हुए इसको विशेष भाषा का दर्जा दिलाना होगा |

 

हम सबका अभिमान हिंदी 

भारत देश की शान है हिंदी” 

 

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