इराक में मिले भगवान राम के अस्तित्व के सबूत, चौंकाने वाले हैं प्रमाण, जानिए पूरी सच्चाई

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भगवान राम को लेकर बहुत सारे विवाद हैं जो आज भी जिंदा हैं। भगवान राम का अस्तित्व कुछ लोग मानते हैं और कुछ लोग नहीं। बहुत सारी संस्थाएं भगवान राम को लेकर शोध भी कर रहीं हैं। भगवान राम का विषय ही ऐसा है जिसपर शोध जरूरी है। वहीं इन सबके बीच एक चौंकाने वाला खुलासा भी सामने आया है। वो खुलासा जिससे सुनने के बाद सभी लोग हैरान है।

दरअसल भगवान राम का अस्तित्व भारत से दूर इराक में मिला है। इराक में एक पहाड़ी पर भगवान राम और हनुमान के साक्ष्य मिले हैं। भारत से अयोध्या शोध संस्था की एक टीम इराक गई थी। यहां पर प्रतिनिधिमंडल को इसी साल के जून महीने में दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इन भित्तिचित्र पर शोध प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया है कि ये भगवान राम की ही छवि है। बता दें कि प्रतिनिधिमंडल को भगवान राम के ये साक्ष्य होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में बने हैं। इस चित्र में एक राजा की छवि है। जिसमें धनुष पर तीर ताना हुआ है। इतना ही नहीं, उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या एक छोटी सी तलवार लगी है। वही इस दौरान शोधकर्ताओं को एक और छवि मिली है। जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है।


इस दावे के बीच एक विरोधाभास भी है। ये विरोधाभास इराक की तरफ से है। इरक के इतिहासकार इस चित्र को भगवान राम का चित्र नहीं मानते। इराक के इतिहासकारों का कहना है कि ये भितितचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना ज्यादा जरूरी है। इसलिए इराक के इतिहासकारों ने इस शोध के लिए इराक सरकार से अनुमति मांगी है। वही सरकार से अनुमति मिलने के बाद ही इन साक्ष्यों पर काम किया जाएगा। शोधकारों ने विभिन्न संदर्भों का हवाला देते हुए बताया है कि लोअर मेसोपोटामिया पर 4500 और 1900 ईसा पूर्व के बीच सुमेरियों का शासन था। उन्होंने कहा कि ऐसे साक्ष्य हैं कि वह भारत आए और अनुवांशिक रूप से सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े थे। यूपी के संस्कृति विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें कहा गया है कि अयोध्या में एक ही छत के नीचे दुनिया के विभिन्न स्थानों से मिले भगवान राम के भित्तिचित्र रखे जाएंगे।

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