36 घंटे बाद सुलझ गई अमेठी से बीजेपी कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह की हत्या की मर्डर मिस्ट्री

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अमेठी के बरोलिया गांव के पूर्व ग्राम प्रधान की हत्या के बाद अमेठी की नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी ने जब कंधा दिया तो पूरे देश ने स्मृति ईरानी की तारीफ की । ये स्मृति ईरानी का पार्टी के कार्यकर्ता को बेहद भावभीनी श्रद्धांजलि थी । पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह की घर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । ये आरोप लगाए गए कि चुनावी रंजिश की वजह से उनकी हत्या की गई । 36 घंटे बाद यूपी पुलिस ने खुलासा कर दिया कि इस हत्याकांड के पीछे स्थानीय चुनावी रंजिश थी ।

स्थानीय स्तर पर राजनीतिक रंजिश की वजह से हुई हत्या.

अमेठी के बरौलिया गांव में पसरा ये मौत का मातम है. दूर-दूर तक सन्नाटा ये बता रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह की हत्या का असर अमेठी के जेहन पर किस कदर हुआ है.

यूपी पुलिस ने मर्डर की गुत्थी सुलझाई. उन तीन गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पुलिस केस सुलझा सकी है । हत्याकांड में 5 नामजद बनाए गए हैं । 2 अब भी फरार हैं । गिरफ्तार लोगों में बीडीसी सदस्य रामचंद्र, धर्मनाथ गुप्ता और नसीम की गिरफ्तारी हुई है. रामचंद्र का एक राजनीतिक दल से संबंध बताया जा रहा है. वसीम, नसीम और धर्मनाथ गुप्ता बरौलिया गाँव के ही रहने वाले हैं जबकि गोलू फुरसतगंज और रामचंद्र जामो गांव के रहने वाले है.

तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस वसीम और गोलू की तलाश में छापे पर छापे डाल रही है. दरअसल सुरेंद्र सिंह अमेठी की नई सांसद स्मृति ईरानी के करीबी थे. लोकसभा चुनाव के दौरान स्मृति ईरानी के लिए चुनाव प्रचार भी किया. लेकिन जीत का जश्न मना सकें उसके पहले ही उन्हें मौत की नींद सुला दिया गया.  दरअसल शनिवार की आधी रात अपने घर के बरामदे में सोए सुरेंद्र सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी गईं. खून से लथपथ सुरेंद्र सिंह वहीं गिर पड़े. आनन-फानन में उन्हें लखनऊ इलाज के लिए ले जाया गया लेकिन जिंदगी ने उन्हें वक्त नहीं दिया और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.

सुरेंद्र सिंह स्मृति के कितने करीबी थे इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव के दौरान स्मृति के साथ कई बार मंच पर नज़र आए थे. हर मंच से स्मृति ने सुरेंद्र सिंह की तारीफ भी की. इसीलिए जब सुरेंद्र की हत्या की खबर आई तो स्मृति सीधे उनके परिवार से मिलने अमेठी पहुंच गईं. सुरेंद्र की अंतिम यात्रा में शामिल हुईं, अर्थी को कंधा दिया, परिवार को संवेदना दी.

फ़िलहाल तो यूपी पुलिस ने ये साफ कर दिया है कि ये स्थानीय स्तर पर चुनावी रंजिश थी । पिछले कई सालों से ये रंजिश चली आ रही थी ।

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